कौन रोक रहा है भारतीय शिक्षा क्षेत्र के रिवाइवल को?

तथ्यों को तोड़ – मरोड़ कर पेश करने से भारत के लिए बहुत जरूरी एडटेक – रेवोल्यूशन में देरी ही हो रही है। एक पक्षपातपूर्ण और आधारहीन तर्क देश के भविष्य को गर्त में धकेल रहा है । किसी को भी भारत के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है – इस देश के सिस्टम को भी नहीं ।

Education Sector Revival edtech

भारत में शिक्षा क्षेत्र रिवाइवल की राह देख रहा है। Educomp ने पहले भी इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के साथ क्रांति का नेतृत्व किया। कंपनी इसे दोबारा भी कर सकती है; यदि केवल क्षेत्र की वृद्धि को रोंकने वाली परेशानियों को दूर कर दिया जाए ।

यदि भारत विश्व में सुपरपॉवर बनना चाहता है तो उसे शिक्षा क्षेत्र में बहुत काम करने की जरूरत है। जैसा कि प्रतीत हो रहा है इस क्षेत्र में निहित स्वार्थों वाला एक समूह इसे आगे बढ़ने से रोक रहा है। एक अरब लोगों का भाग्य कौन रोक रहा है? और क्यों? क्या वे इस बदलाव की शीघ्रता और आवश्यकता को समझते भी हैं?

edtech indiaआरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में जोर देकर कहा कि भारत में शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नए तरीकों को अपनाने पर बल देना होगा । उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की इसे बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत के बीमारू शिक्षा क्षेत्र को जल्द से जल्द सुधारने की जरूरत है, सवाल यह है कि यह कहां से शुरू होगा और इसका नेतृत्व कौन करेगा?

भारत की तकनीकी शिक्षा में क्रांति का नेतृत्व 90 के दशक में Educomp ने किया था। यद्यपि कंपनी आज दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रही है, लेकिन इसके विचार, प्रौद्योगिकी, विशेषज्ञता और अनुभव इसे दूसरी कंपनियों से फ्यूचरिस्टिक एड्ज देते हैं। कंपनी द्वारा लाये गए डिजिटल क्लासरूम के कांसेप्ट ने एक नए तरीके का एडटेक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया । Educomp के भविष्य के नेतृत्व में रिवाइवल को दोहराने की सभी संभावनाएं हैं, और यह भारतीय शिक्षा क्षेत्र में रिवाइवल के दूसरे चरण को शुरू कर सकती है ।

3 बिलियन डॉलर की मल्टीनेशनल टेक कंपनी Ebix अभी तक Educomp का नियंत्रण लेने की राह देख रही है । यह समूह विश्व भर में अपनी सफलता की कहानियों के लिए जाना जाता है। आधुनिक संसाधनों से लैस रॉबिन रैना की अगुआई वाली इस कंपनी ने देश में लगभग 50 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और 14 अधिग्रहण भी किए हैं।

उद्योग जगत क्या कहता है?
“Educomp उन कंपनियों में से एक है जिसने यह साबित किया कि आप भारत में एक एडटेक उत्पाद के साथ शुरुआत कर सकते हैं। यदि आप अपने उत्पाद को सही बाजार, सही समय और सही कस्टमर बेस के बीच रखते हैं तो आप हजारों स्कूलों और लाखों छात्रों तक अपनी पहुँच बनाने में सफल हो सकते हैं। Educomp के पास ब्रांड वैल्यू और रिकॉग्निशन है साथ ही अब इस क्षेत्र में BYJU,Cumath जैसी कई अन्य कंपनियां भी काम कर रही हैं, इससे लगता है कि आने वाले समय में आप एडटेक स्पेस से और भी अच्छी खबरों की उम्मीद कर सकते हैं। “

– प्रियदीप सिन्हा, सीईओ, Kidovators

  • इसे विडंबना ही कहेंगे कि Educomp की बैंकरप्सी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस और गार्ड में परिवर्तन की प्रक्रिया काफी समय से एक कानूनी भंवर में फंसी हुई है। इस मामले की तह तक जाने पर पता चलता है कि इस क्षेत्र में निहित स्वार्थों वाले कई समूह नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के साथ कंपनी की रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं ।

    घटनाक्रम

    Educomp ने 2017 में बैंकरप्सी फ़ाइल की। बिक्री प्रक्रिया शुरू हुई, जिसके बाद लेनदारों की समिति गठित हुई।
  • अंतरराष्ट्रीय लेखांकन कंपनी बीडीओ के एक प्रस्ताव पेशेवर महेंद्र खंडेलवाल को Educomp पर नियंत्रण रखने के लिए लेनदारों की समिति ने वोट दिया।
  • प्रस्तावों पर चर्चा और बहस करने के लिए 20 से अधिक बार समिति की बैठक हुई ।
  • एक वर्चुअल डेटा रूम बनाया गया था और संभावित खरीदारों को इसका एक्सेस दिया गया था।
  • सावधानी से परखने के बाद, दो खरीदारों ने अपनी बोलियां आगे बढ़ाईं।
  • Ebix ने बोली जीती और कंपनी के रिवाइवल के लिए उसकी रिज़ॉल्यूशन की योजना को सीओसी की स्वीकृति मिली।
  • रिज़ॉल्यूशन की प्रक्रिया के दौरान, प्राइसवाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) और क्रॉल जैसे ऑडिटर्स समेत कई स्वतंत्र पेशेवरों ने पूरी प्रोसेस की स्क्रीनिंग की और इसे मंजूरी दी ।
  • उनकी रिपोर्ट में बताया गया कि सभी कर्जों का निपटारा हो गया था और आवश्यक मानदंडों का पालन भी किया गया था।
  • धारा 29 (ए) के तहत बताए गए रिलेटेड पार्टी लेनदेन के मामले पर भी चर्चा हुई और Ebix को एक रिलेटेड पार्टी नहीं पाया गया।
  • विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, और इंडिपेंडेंट ऑडिटर्स की रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए, लेनदारों की समिति ने 76% के बहुमत के साथ Ebix द्वारा प्रस्तावित समाधान के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जो कि कानून द्वारा अनिवार्य 65% से ज्यादा थे ।

[founderINDIA ने क्रॉल और पीडब्ल्यूसी रिपोर्ट की एक प्रति की समीक्षा की है, जो स्पष्ट रूप से बताती है कि प्रक्रिया को कानून के अनुसार पूरा किया गया था।]

प्लांटिंग रोडबलॉक्स

यहीं से Educomp की दिवालिया समाधान प्रक्रिया संदिग्ध हो जाती है। मोदी सरकार की प्राथमिकता सूची में व्यापार शुरू करना और उससे बाहर निकलना काफी आसान है । दिवालिया कानून इस दिशा में एक ऐसी ही प्रमुख नीति है। लेकिन ऐसा लगता है कि मोदी सरकार जो प्रपोज़ करती है ‘सिस्टम’ उसे डिस्पोज़ कर देता है ।

इसे पूरा करने की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के बावजूद कई मीडिया रिपोर्टों में इस प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं । ये रिपोर्टें इस लिए भी संदिग्ध लगती हैं कि इस प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाला लेखक एक जाना – माना टेलीकॉम विशेषज्ञ है जिसने अपने दो दशकों के कैरियर में कानूनी मुद्दों और शिक्षा क्षेत्र पर यदा – कदा ही लिखा है।

संदिग्धता और लाल फीताशाही ?

इससे भी ज्यादा संदेह में डालने वाली बात यह है कि इन घटनाओं में एक ‘पैटर्न’ दिखता है। ज्यादातर रिपोर्ट मामले की कार्यवाही के साथ ही प्रकाशित हो जाती हैं। यदि रेपुटेड पब्लिकेशन में नहीं तो ऐसी रिपोर्टें स्वतंत्र पत्रकारों के स्वामित्व वाले दूरसंचार पोर्टल पर स्थान अवश्य पा जाती हैं।

इन रिपोर्टों से यह तो पहले ही स्पष्ट हो गया था कि ये विरोधियों द्वारा प्रेरित और एजेंडा संचालित हैं, एक संसद सदस्य नीरज शेखर ने केंद्रीय जांच ब्यूरो, केन्द्रीय सतर्कता आयोग और बैंकरप्सी एंड इंसोल्वेंसी बोर्ड ऑफ इंडिया सहित कई जांच एजेंसियों को चिह्नित करते हुए प्रधान मंत्री को एक पत्र लिखा । यह पत्र एक व्हिस्टल-ब्लोअर की रिपोर्ट को आधार बनाकर लिखा गया है । इसमें लिखा है कि एक विशेष पत्रकार ही प्रक्रिया पर उंगली उठा रहा है । जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये रिपोर्टें एनसीएलटी में Educomp की रिज़ॉल्यूशन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए लिखी जा रहीं हैं और इसके पीछे Educomp के किसी कॉम्पिटीटर का हाथ है ।

व्हिस्टल – ब्लोअर के पत्र में दर्शाए गए तथ्यों से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि प्रक्रिया को रोंकने के कई प्रयास किए गए हैं और मीडिया में इस विषय में खबरें चलना इन तथ्यों की पुष्टि करता हैं । सबूतों से यह भी पता चलता है कि इन पत्रकार महोदय को Educomp के कॉम्पिटीटर द्वारा नियंत्रित एक कंपनी से भारी मात्रा में रकम मिल रही है।

Educomp का रिवाइवल इसके कॉम्पिटीटर Extramarks के लिए एक खतरा बन गया है। Extramarks के एक डायरेक्टर ने अपनी एक अन्य कंपनी के माध्यम से पत्रकार को भुगतान किया है, founderINDIA के पास इस बात का प्रमाण भी है । बैंक लेनदेन को देखते हुए, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इसमें दोनों की मिली भगत हैं।

सांसद के पत्र में यह भी कहा गया है कि ‘paralytic’ कार्यवाही के लाभार्थी और प्रक्रिया पर प्रश्न उठाने वाले पत्रकार के बीच सीधा संबंध है।

(founderINDIA के पास सांसद के पत्र के साथ-साथ व्हिस्टल – ब्लोअर की रिपोर्ट भी है।)

इस तरह संदिग्ध रूप से कुछ लोगों की मिलीभगत द्वारा प्रक्रिया को नुकसान पहुँचाना एक खतरे की घंटी की तरह है । गैर जिम्मेदार मीडिया रिपोर्टिंग न केवल एक कंपनी के भाग्य को खतरे में डाल रही है बल्कि एक विशेष सेक्टर की ग्रोथ और रिवाइवल को भी बाधित कर रही है ।

इस तरह तथ्यों को तोड़ – मरोड़ कर पेश करने से भारत के लिए बहुत जरूरी एडटेक – रेवोल्यूशन में देरी ही हो रही है। एक पक्षपातपूर्ण और आधारहीन तर्क देश के भविष्य को गर्त में धकेल रहा है । किसी को भी भारत के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है – इस देश के सिस्टम को भी नहीं ।

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